हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट: फैजाबाद-अयोध्या / नया इमामबाड़ा, अमसन में ताज़ियती जलसा और मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन अंजुमन-ए-असग़रिया अमसन कलाँ के तहत हुआ, जिसमें इलाके के मोअज़्ज़ज़ उलेमा-ए-किराम ने शिरकत की। इस प्रोग्राम में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और माहौल निहायत ग़मगीन और रूहानी रहा।

इस ताज़ियती जलसे को मौलाना मुहम्मद आमिर, मौलाना मुहम्मद अली गोहर, मौलाना मुहम्मद अब्बास मूनिस, मौलाना जाफ़र रज़ा आबिदी, मौलाना क़मर महदी, मौलाना मुहम्मद काज़िम और मौलाना इम्तियाज़ अब्बास रज़वान ने अपने विचार व्यक्त किए।
आख़िर में मजलिस-ए-अज़ा हुई, जिसे मौलाना मुहम्मद काज़िम ने ख़िताब किया, जिसमें उन्होंने अहलेबैत (अ) की तालीमात, सब्र और सच्चाई के रास्ते पर चलने की अहमियत को बयान किया।

उलेमा-ए-किराम ने अपने ख़ुत्बात में आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई की सादगी भरी ज़िंदगी, उनके आमाल और उनकी बंदगी पर रोशनी डाली। उन्होंने साफ तौर पर यह पैग़ाम दिया कि असली सुपर पावर सिर्फ अल्लाह है — वही ताक़त है जो इंसान को हक़ पर डटे रहने की हिम्मत देती है।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अल्लाह को अपनी असली ताक़त समझते हैं, वह अकेले होकर भी हक़ के लिए खड़े रहते हैं, जबकि जो लोग दुनियावी ताक़तों (जैसे अमेरिका और इसराइल) को ही सुपर पावर समझ बैठे हैं, वह अपनी ज़मीनें तक उनके अड्डों के लिए दे देते हैं। यह एक खुला सबक़ है कि असली ताक़त ईमान और अल्लाह पर भरोसे में है, न कि दुनिया की झूठी ताक़तों में।

जलसे में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि दुनिया की कोई भी कामयाबी बगैर विलायत के मुमकिन नहीं है, और इंसान की असली कामयाबी इसी में है कि वह हक़ और विलायत के रास्ते पर क़ायम रहे।
मजलिस के दौरान शोहदा की याद में खिराज-ए-अकीदत पेश किया गया। प्रोग्राम के इख्तिताम पर ईरान की कामयाबी और फतह के लिए खास दुआ की गई और शोहदा के लिए सूरह फातिहा पढ़ी गई।

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